उत्तराखंडकीर्तिनगरटिहरी

देवदूत बने सुरेंद्र सिंह रावत: अनाथ रचिता को मिला शिक्षा का संबल, फाउंडेशन ने उठाई आजीवन जिम्मेदारी।

कीर्तिनगर (देवप्रयाग), 30 मार्च 2026।
पर्वतीय क्षेत्र देवप्रयाग के नौड़ा धौलियाणा (चौनिखाल) गांव से मानवता और संवेदनशीलता की एक प्रेरक कहानी सामने आई है। रुक्मणी उत्कर्ष फाउंडेशन के संस्थापक सुरेंद्र सिंह रावत ने 8 वर्षीय अनाथ बालिका रचिता नेगी के जीवन को नई दिशा देने का सराहनीय कदम उठाया है। उन्होंने रचिता की आजीवन शिक्षा-दीक्षा का संपूर्ण खर्च वहन करने का संकल्प लिया है।
संघर्षों से भरा बचपन
रचिता की जिंदगी कम उम्र में ही कठिनाइयों से घिर गई थी। पिता स्वर्गीय करण सिंह नेगी के निधन के बाद उसकी मां के पुनर्विवाह से वह अपने वृद्ध दादा बुद्धि सिंह नेगी और दादी उर्मिला देवी के साथ रहने को मजबूर हो गई। सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के बीच दादा-दादी के लिए उसकी पढ़ाई जारी रखना एक बड़ी चुनौती बन गई थी।
परिवार ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से कई बार मदद की गुहार लगाई, लेकिन उन्हें कहीं से भी ठोस सहायता नहीं मिल सकी।
फाउंडेशन बना उम्मीद की किरण
जैसे ही इस परिवार की स्थिति की जानकारी सुरेंद्र सिंह रावत को मिली, उन्होंने बिना देर किए मदद का हाथ बढ़ाया। सोमवार को वे स्वयं गांव पहुंचे और परिवार से मुलाकात कर हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
तत्काल सहायता: ₹5100 की आर्थिक मदद प्रदान की
आजीवन संकल्प: रचिता की पूरी शिक्षा का खर्च अब फाउंडेशन उठाएगा
भावुक हुए परिजन
इस मदद से रचिता के दादा-दादी भावुक हो उठे। दादी उर्मिला देवी ने कहा कि जब हर ओर से उम्मीदें खत्म हो चुकी थीं, तब सुरेंद्र सिंह रावत उनके लिए देवदूत बनकर आए और उनकी पोती के भविष्य को अंधकार से निकालकर उजाले की ओर ले गए।
यह पहल न केवल एक मासूम के भविष्य को संवारने का प्रयास है, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण भी है कि संवेदनशीलता और सहयोग से किसी का जीवन बदला जा सकता

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