उत्तराखंडदेहरादून

नीती घाटी आपदा ने बढ़ाई हिमालयी क्षेत्रों की चिंता, संसद में राष्ट्रीय हिमालयी आपदारोधी अवसंरचना मिशन की मांग।

राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने केंद्र सरकार का ध्यान प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती चुनौती की ओर खींचा, चारधाम यात्रा और पर्यटन के लिए वैज्ञानिक एवं डिजिटल व्यवस्था पर दिया जोर।

देहरादून, 12 अगस्त। राज्यसभा सांसद एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने उत्तराखंड के चमोली जिले की नीती घाटी में हालिया आपदा से हुए नुकसान को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार का ध्यान हिमालयी क्षेत्रों की बढ़ती प्राकृतिक आपदा की चुनौती की ओर आकर्षित किया। उन्होंने राज्यसभा में उत्तराखंड सहित पूरे हिमालयी क्षेत्र के लिए ‘राष्ट्रीय हिमालयी आपदारोधी अवसंरचना मिशन’ शुरू किए जाने की पुरजोर मांग उठाई।

सदन में अपनी बात रखते हुए भट्ट ने कहा कि 10 अगस्त को चमोली जिले की नीती घाटी के तमकु क्षेत्र में बादल फटने और भारी जलप्रवाह से जनजीवन एवं संपर्क व्यवस्था प्रभावित हुई। यह घटना एक बार फिर बताती है कि हिमालयी क्षेत्रों में पारंपरिक आपदा प्रबंधन व्यवस्था से आगे बढ़कर पूर्व चेतावनी, सुरक्षित अवसंरचना और वैज्ञानिक तकनीक पर आधारित एकीकृत आपदा प्रबंधन प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में बादल फटना, अचानक बाढ़, भूस्खलन और अतिवृष्टि जैसी घटनाएं लगातार गंभीर चुनौती बन रही हैं। पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक संवेदनशीलता और मौसम में हो रहे बदलावों का सीधा असर सड़कों, पुलों, बिजली, पेयजल, संचार व्यवस्था और स्थानीय आजीविका पर पड़ रहा है।
हिमालयी क्षेत्रों के लिए अलग आपदारोधी मिशन की जरूरत
महेंद्र भट्ट ने केंद्र सरकार से मांग की कि उत्तराखंड सहित पूरे हिमालयी क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय हिमालयी आपदारोधी अवसंरचना मिशन शुरू किया जाए। इसके तहत संवेदनशील घाटियों, नदियों और नालों की वैज्ञानिक हैजार्ड मैपिंग कराई जाए तथा बादल फटने, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन जैसी घटनाओं के लिए रियल टाइम अर्ली वार्निंग सिस्टम को ग्राम स्तर तक पहुंचाया जाए।
उन्होंने कहा कि हिमालय की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सड़कों, पुलों, सुरंगों और पेयजल प्रणालियों का निर्माण आपदारोधी डिजाइन के अनुरूप किया जाना चाहिए। इसके साथ ही सीमावर्ती एवं दुर्गम क्षेत्रों में बीआरओ, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन के लिए स्थायी त्वरित आपदा प्रतिक्रिया केंद्र स्थापित किए जाने की आवश्यकता है।
चारधाम यात्रा और पर्यटन के लिए डिजिटल व्यवस्था पर जोर
भट्ट ने उत्तराखंड में बढ़ती चारधाम यात्रा और पर्यटन गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यात्रियों एवं पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए आवाजाही को वैज्ञानिक एवं डिजिटल प्रणाली के माध्यम से नियंत्रित और व्यवस्थित किया जाना चाहिए। संवेदनशील मार्गों पर मौसम, सड़क की स्थिति, यातायात क्षमता और आपदा जोखिम के आधार पर रियल टाइम निगरानी एवं यातायात प्रबंधन की व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हिमालयी राज्यों में विकास और पर्यावरणीय संवेदनशीलता के बीच संतुलन कायम करते हुए ऐसी अवसंरचना तैयार करना समय की आवश्यकता है, जो प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी अधिक सुरक्षित और टिकाऊ साबित हो सके।
सांसद महेंद्र भट्ट ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार हिमालयी क्षेत्रों की विशिष्ट परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस दिशा में ठोस और दीर्घकालिक कदम उठाएगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button