देहरादूनमसूरी

मसूरी के नए डीएफओ देवी प्रसाद बलोनी ने संभाली कमान, बोले—नियमों के दायरे में विकास कार्य नहीं रुकेंगे।

मसूरी। पहाड़ों की रानी मसूरी में विकास कार्यों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कायम रखना वन विभाग के सामने बड़ी चुनौती है। इसी बीच देवी प्रसाद बलोनी ने मसूरी वन प्रभाग के नए प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) के रूप में कार्यभार ग्रहण कर लिया है। पदभार संभालते ही उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट करते हुए कहा कि मसूरी में विकास जरूरी है, लेकिन इसकी प्राकृतिक सुंदरता, वन संपदा और पर्यावरण की कीमत पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
कार्यभार ग्रहण के अवसर पर निवर्तमान डीएफओ अमित कुमार के सम्मान में विदाई समारोह भी आयोजित किया गया। इस दौरान अमित कुमार ने अपने कार्यकाल के अनुभव साझा करते हुए विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों से नियमों के अनुरूप पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वन विभाग का दायित्व केवल सरकारी निर्देशों का पालन करना नहीं, बल्कि वनों और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।
वैध विकास कार्यों में नहीं आएगी अनावश्यक बाधा
पत्रकारों से बातचीत में नए डीएफओ देवी प्रसाद बलोनी ने निर्माण और विकास कार्यों को लेकर विभाग की नीति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि नियमों के तहत होने वाले कार्यों को अनावश्यक रूप से नहीं रोका जाएगा, लेकिन नियमों की अनदेखी कर किसी भी निर्माण या गतिविधि को अनुमति नहीं दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि मसूरी की पहाड़ियों में निर्माण को लेकर विभिन्न स्तरों पर नियम और निगरानी व्यवस्था लागू है। ऐसे में किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले संबंधित अनुमति और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य होगा। जिन मामलों में उच्च स्तर से अनुमति आवश्यक होगी, उनमें संबंधित स्वीकृति मिलने के बाद ही कार्य आगे बढ़ाया जाएगा।
मसूरी से पहले से है गहरा परिचय
देवी प्रसाद बलोनी के लिए मसूरी कोई नया कार्यक्षेत्र नहीं है। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी वह वन विभाग में अलग-अलग जिम्मेदारियों के दौरान दो बार मसूरी में सेवाएं दे चुके हैं। ऐसे में उन्हें यहां की भौगोलिक परिस्थितियों, वन क्षेत्रों और स्थानीय चुनौतियों की पहले से जानकारी है।
डीएफओ ने कहा कि मसूरी की सबसे बड़ी पहचान इसकी प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ियां और वन संपदा हैं। इनका संरक्षण उनकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रहेगा।
विकास की रफ्तार में न खो जाए मसूरी की पहचान
बलोनी ने कहा कि विकास समय की जरूरत है, लेकिन विकास की दौड़ में पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ना चिंता का विषय है। मसूरी की पहचान उसके जंगलों, पहाड़ों और प्राकृतिक वातावरण से है। यदि इन्हीं संसाधनों पर दबाव बढ़ता गया तो आने वाले समय में शहर की मूल पहचान प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने कहा कि वन संरक्षण और पर्यावरण से जुड़े मामलों में विभाग नियमों के अनुसार आवश्यक सख्ती बरतेगा। वहीं, जनहित से जुड़े वैध विकास कार्यों में विभागीय स्तर पर आवश्यक सहयोग भी दिया जाएगा।
जनता के लिए ‘पब्लिक सर्वेंट’ के रूप में काम करने का भरोसा
नए डीएफओ ने अपनी कार्यशैली को लेकर भी स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वह जनता की सेवा के लिए नियुक्त ‘पब्लिक सर्वेंट’ हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि नियमों के तहत जनता के जिन कार्यों का निस्तारण होना है, उनमें अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जनहित और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन जरूरी है। वैध कार्यों को केवल इस वजह से नहीं रोका जाएगा कि वे वन विभाग से संबंधित हैं, लेकिन पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले कार्यों को जनहित के नाम पर मंजूरी भी नहीं दी जाएगी।
संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
डीएफओ बलोनी ने कहा कि मसूरी के जंगलों और पर्यावरण की रक्षा केवल वन विभाग के प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न विभागों का सहयोग भी जरूरी है। उन्होंने बेहतर परिणाम के लिए सामूहिक प्रयास और टीमवर्क को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने दायित्वों के प्रति जवाबदेह रहने तथा प्रत्येक कार्य में नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
निवर्तमान डीएफओ अमित कुमार को दी विदाई
कार्यभार ग्रहण समारोह के साथ निवर्तमान डीएफओ अमित कुमार के लिए विदाई कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इस दौरान उन्होंने विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ अपने कार्यकाल के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि वन विभाग में कार्य करते समय नियमों का पालन और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
नए डीएफओ देवी प्रसाद बलोनी ने अमित कुमार को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
अब नए डीएफओ के सामने सबसे बड़ी चुनौती मसूरी में बढ़ती विकास गतिविधियों के बीच पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की होगी। उनके शुरुआती रुख से स्पष्ट है कि विभाग नियमों के अनुरूप विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण—दोनों को साथ लेकर चलने की रणनीति पर आगे बढ़ेगा।

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