उत्तराखंडकीर्तिनगरटिहरी

आठ दशक बाद भी सड़क का इंतजार कर रहा गवाणा, ग्रामीणों ने दी 2027 चुनाव बहिष्कार की चेतावनी।

पीएमजीएसवाई से प्रस्तावित सड़क पर वन और राजस्व विभाग के बीच भूमि विवाद का पेंच, कई सर्वे के बाद भी निर्माण अधर में; विधायक की 15 लाख की घोषणा पर भी उठे सवाल।

कीर्तिनगर। आजादी के आठ दशक बीत जाने के बाद भी कीर्तिनगर विकासखंड का गवाणा गांव सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष कर रहा है। वर्षों से सड़क निर्माण की मांग उठा रहे ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। सरकारी विभागों के कई सर्वे, जनप्रतिनिधियों के आश्वासन और प्रशासनिक बैठकों के बावजूद सड़क निर्माण की दिशा में ठोस पहल नहीं होने से ग्रामीणों में गहरी नाराजगी है। अब ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सड़क निर्माण का कार्य धरातल पर शुरू नहीं हुआ तो वे चुनाव का बहिष्कार करेंगे।
बुधवार को गवाणा ने ढुंढरियागा चौराहे से एसडीएम कार्यालय कीर्तिनगर तक जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सड़क निर्माण की मांग उठाई तथा एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।
पीएमजीएसवाई से बननी थी सड़क, वन और राजस्व विभाग के बीच भूमि विवाद बना अड़चन

गवाणा गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत सड़क निर्माण प्रस्तावित था। ग्रामीणों के अनुसार, संबंधित निर्माण विभाग द्वारा कई बार सड़क का सर्वे भी किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद परियोजना आगे नहीं बढ़ पाई।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण में अब वन विभाग और राजस्व विभाग के बीच भूमि को लेकर विवाद सामने आ रहा है। बताया जा रहा है कि भूमि की स्थिति और विभागीय अधिकार क्षेत्र को लेकर स्पष्टता नहीं होने के कारण सड़क निर्माण की प्रक्रिया अटकी हुई है।
इस स्थिति ने ग्रामीणों को असमंजस में डाल दिया है। उनका कहना है कि वे पीढ़ियों से गांव में निवास कर रहे हैं और संबंधित भूमि उनके नाम पर दर्ज है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब ग्रामीणों के पास भूमि के स्वामित्व से संबंधित अभिलेख मौजूद हैं, तो सड़क निर्माण के लिए भूमि संबंधी विवाद का समाधान अब तक क्यों नहीं हो पाया? क्या दोनों विभागों के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा गांव के लोगों को भुगतना पड़ रहा है?
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी विभागों की आपसी पेचीदगियों के बीच उनका गांव विकास की मुख्यधारा से कटकर रह गया है। वर्षों से सर्वे होने के बावजूद सड़क का निर्माण शुरू नहीं होना उन्हें अपने साथ हुए छल जैसा महसूस करा रहा है।
श्रमदान तक की तैयारी, एसडीएम के 10 दिन के आश्वासन का भी इंतजार

सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों का संघर्ष लंबे समय से जारी है। इससे पहले जब प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस समाधान नहीं निकला तो ग्रामीणों ने खुद श्रमदान करके सड़क बनाने की तैयारी कर ली थी। उस दौरान एसडीएम स्वयं गांव पहुंचे थे और ग्रामीणों को 10 दिन का समय देते हुए समस्या के समाधान की दिशा में ठोस कार्रवाई का आश्वासन दिया था। प्रशासन के भरोसे पर ग्रामीणों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया था।
लेकिन ग्रामीणों के अनुसार, उस आश्वासन के बाद भी सड़क निर्माण की दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई। अब एक बार फिर ग्रामीणों को प्रदर्शन के लिए मजबूर होना पड़ा है। ऐसे में सवाल है कि प्रशासन द्वारा दिए गए समयबद्ध आश्वासन पर अब तक क्या कार्रवाई हुई और यदि विभागीय स्तर पर कोई बाधा है तो उसे दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए?
दस साल से विधायक, अब चुनाव से पहले 15 लाख की घोषणा पर सवाल
गवाणा की सड़क समस्या को लेकर स्थानीय विधायक विनोद कंडारी की भूमिका पर भी ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि करीब दस वर्षों से क्षेत्र का प्रतिनिधित्व होने के बावजूद गांव आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित है।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने यह भी कहा कि विधायक की ओर से सड़क निर्माण के लिए 15 लाख रुपये विधायक निधि से देने की बात कही जा रही है। लेकिन चुनावी वर्ष नजदीक आने के बीच सामने आई इस राशि को लेकर ग्रामीणों के मन में कई सवाल हैं।
यदि सड़क का शेष निर्माण लगभग चार किलोमीटर तक होना है तो 15 लाख रुपये में यह काम किस तरह पूरा होगा? इस हिसाब से प्रति किलोमीटर महज 3.75 लाख रुपये की राशि बैठती है। पहाड़ी क्षेत्र में सड़क निर्माण के लिए कटिंग, सुरक्षा दीवार, पुश्ते, जल निकासी और अन्य तकनीकी कार्यों की जरूरत होती है। ऐसे में क्या यह राशि केवल किसी शुरुआती कार्य के लिए है या इससे पूरी सड़क का निर्माण संभव होगा?
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि सड़क निर्माण के लिए पीएमजीएसवाई के तहत योजना प्रस्तावित थी तो उसकी प्रक्रिया आगे क्यों नहीं बढ़ी? क्या विधायक स्तर से संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर वन एवं राजस्व विभाग की अड़चनों को दूर करने का प्रयास किया गया? ग्रामीण अब घोषणाओं के बजाय पूरी सड़क के लिए स्वीकृत बजट और निर्माण की निश्चित समयसीमा जानना चाहते हैं।
‘रोड नहीं तो वोट नहीं’, अब आर-पार के मूड में ग्रामीण
गवाणा संघर्ष समिति के अध्यक्ष केदार सिंह नेगी सहित ग्रामीणों का कहना है कि सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और क्षेत्र के समग्र विकास की पहली जरूरत है। सड़क सुविधा के अभाव में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने से लेकर रोजमर्रा की आवश्यकताओं तक के लिए ग्रामीणों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि अब उन्हें नए आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर काम चाहिए। यदि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सड़क निर्माण की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे चुनाव का बहिष्कार करेंगे। प्रदर्शन के दौरान ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ का नारा बुलंद करते हुए ग्रामीणों ने अपनी नाराजगी जाहिर की।
इस मौके पर केदार सिंह नेगी, रतन सिंह बलूडी,ग्राम प्रधान सुरेश सिंह चौहान, पूर्व प्रधान सरोजनी देवी कैन्तुरा, विजया देवी,रविन्द्र सिंह नेगी, अरुण नेगी, प्रदीप गोदियाल, गौरव राणा,जगत सिंह चौहान,राजू चौहान,धनवीर कैन्तुरा सहित बड़ी संख्या मातृशक्ति और ग्रामीण मौजूद रहे।

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