उत्तराखंडदेहरादून

सावन मास में भक्ति का महासंगम: ज्योति रौतेला द्वारा आयोजित कीर्तन मंडली सम्मान समारोह में 78 मंडलियों ने बिखेरा भक्ति रस, सैकड़ों मातृशक्ति रही मौजूद।

देहरादून, 05 अगस्त। सावन मास की पावन बेला में भक्ति, संस्कृति और महिला सशक्तिकरण का अद्भुत संगम देखने को मिला। उत्तराखंड महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती ज्योति रौतेला द्वारा आयोजित कीर्तन मंडली सम्मान समारोह एवं प्रतियोगिता का भव्य आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। प्रातः 10:00 बजे प्रारंभ हुआ यह कार्यक्रम देर शाम लगभग 7:00 बजे तक श्रद्धा, उत्साह और भक्तिमय वातावरण के बीच निरंतर चलता रहा।

कार्यक्रम में लगभग 78 कीर्तन मंडलियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए भगवान शिव, श्रीराम, श्रीकृष्ण एवं माँ भगवती की महिमा का गुणगान किया। मंडलियों ने मधुर भजनों, संगीतमय कीर्तन एवं पारंपरिक सांस्कृतिक नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियों से उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। सावन के पवित्र माह में आयोजित इस भव्य समारोह ने पूरे वातावरण को शिवमय और भक्तिमय बना दिया।
कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में मातृशक्ति की गरिमामयी उपस्थिति रही। विभिन्न क्षेत्रों से आई महिलाओं ने पूरे उत्साह के साथ आयोजन में भाग लिया तथा उत्तराखंड की समृद्ध लोक एवं धार्मिक परंपराओं को जीवंत स्वरूप प्रदान किया। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली कीर्तन मंडलियों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त सभी प्रतिभागी मंडलियों को स्मृति-चिह्न एवं प्रशस्ति-पत्र देकर उनके योगदान का सम्मान किया गया।

इस अवसर पर उत्तराखंड महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती ज्योति रौतेला ने कहा कि सावन का महीना केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि समाज में प्रेम, सेवा, सद्भाव और सांस्कृतिक एकता का संदेश देने का भी अवसर है। कीर्तन हमारी सनातन संस्कृति और लोक परंपराओं की अमूल्य धरोहर है, जिसे नई पीढ़ी तक पहुँचाना हम सभी का दायित्व है। ऐसे आयोजन महिलाओं की प्रतिभा को मंच प्रदान करने के साथ-साथ समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक मूल्यों को सशक्त बनाने का कार्य करते हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजन निरंतर किए जाएंगे, ताकि समाज में आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों को और अधिक मजबूती मिल सके।
दिनभर चले इस आयोजन में भक्ति, संगीत और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। भजनों की मधुर स्वर लहरियों, श्रद्धालुओं के उत्साह और मातृशक्ति की व्यापक भागीदारी ने समारोह को यादगार बना दिया। कार्यक्रम श्रद्धा, संस्कृति और सामाजिक एकजुटता का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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