
देहरादून। वन विभाग में रेंजर, डिप्टी रेंजर, वन दरोगा, वन आरक्षी एवं मिनिस्ट्रियल कर्मचारियों के वार्षिक स्थानांतरण के आदेश जारी होने के बावजूद बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा आदेशों की पालना नहीं किए जाने का मामला सामने आया है। खास बात यह है कि इनमें कई कार्मिक लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात हैं और स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद भी अपने पुराने तैनाती स्थल पर बने हुए हैं।
स्थानान्तरण आदेश जून माह में ही जारी हो चुके थे, तथा विभाग के विभिन्न स्तरों — PCCF HoFF, HRD, एवं गढ़वाल-कुमाऊँ मण्डलों के मुख्य वन संरक्षक कार्यालयों — से अलग-अलग तिथियों पर निर्गत हुए थे। इसके बावजूद, ढाई-तीन माह बीत जाने पर भी अनुपालन सुनिश्चित नहीं हो सका है।
स्थानांतरण अधिनियम-2017 के तहत वार्षिक स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी कर आदेश जारी किए गए हैं, लेकिन आदेशों के बावजूद कार्यभार ग्रहण नहीं करने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। आखिर लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात रहने का क्या कारण है? एक ही जगह पर लंबे समय से बने रहने के पीछे क्या कोई विशेष लाभ है? और स्थानांतरण आदेश जारी होने के बावजूद उनका पालन क्यों नहीं हो रहा है?
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर किसके संरक्षण में अधिकारी/कर्मचारी स्थानांतरण आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं? यदि विभागीय स्तर पर आदेश जारी हो चुके हैं तो संबंधित कार्मिक को तत्काल नई तैनाती पर कार्यभार ग्रहण करना चाहिए था।
इसी मामले को लेकर आज HoFF से मुलाकात कर प्रकरण उनके संज्ञान में लाया गया। HoFF ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्थानांतरण आदेशों की पालना हर हाल में सुनिश्चित की जाएगी। जो भी अधिकारी-कर्मचारी जारी आदेशों की पालना नहीं करेगा, उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी का वेतन भी रोका जाएगा। साथ ही यह भी स्पष्ट रूप से कहा गया कि किसी भी कार्मिक को किसी भी परिस्थिति में एक्सटेंशन नहीं दिया जाएगा।
HoFF ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी DFO/DDO के संरक्षण अथवा स्तर से स्थानांतरण आदेशों की पालना नहीं हो रही है, तो ऐसे अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी और उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
HoFF ने स्थानांतरण आदेशों की पालना के लिए 30 सितंबर की अंतिम समय-सीमा निर्धारित की है। इसके बाद भी यदि कोई अधिकारी-कर्मचारी पुराने तैनाती स्थल पर बना रहता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अब देखने वाली बात यह होगी कि 30 सितंबर के बाद विभाग लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे तथा स्थानांतरण आदेशों की पालना नहीं करने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है और उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी कैसे तय की जाती है।



