
टिहरी गढ़वाल। उत्तराखंड राज्य बने 26 वर्ष हो गए, सरकारें गांव-गांव सड़क और “हर घर सड़क” की बात करती रही हैं, लेकिन टिहरी गढ़वाल का सुदूरवर्ती गवांणा गांव आज भी सड़क की राह देख रहा है।
आज 2 अक्टूबर को ग्राम सभा गवांणा में ग्रामीणों की बैठक आयोजित हुई, जिसमें वर्षों से सड़क के लिए किए जा रहे पत्राचार और मिले आश्वासनों के बावजूद समस्या का समाधान न होने पर ग्रामीणों ने बड़ा फैसला लिया। बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि 5 अक्टूबर को समस्त ग्रामीण सामूहिक श्रमदान करेंगे और सड़क निर्माण का काम स्वयं शुरू करेंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के लिए जिलाधिकारी से लेकर तमाम जनप्रतिनिधियों और स्थानीय विधायक तक लगातार पत्राचार एवं संपर्क किया गया, लेकिन वर्षों बाद भी गांव सड़क से नहीं जुड़ पाया।
गांव की वास्तविक पीड़ा तब सामने आती है जब कोई ग्रामीण बीमार पड़ता है। बीमार व्यक्ति को कुर्सी या चारपाई से बांधकर पथरीली पगडंडियों और ऊंची पहाड़ी चढ़ाई को पार कर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। सड़क मिलने के बाद भी नजदीकी बाजार करीब 20 किलोमीटर दूर है।
बैठक में ग्राम प्रधान सुरेश सिंह चौहान, महिला मंगल दल प्रधान श्रीमती ऋतु देवी और युवा मंगल दल के जस्सू भाई नेगी की मौजूदगी में ग्रामीणों ने एकजुट होकर निर्णय लिया कि अब केवल आश्वासन का इंतजार नहीं किया जाएगा।
ग्रामीणों ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी स्पष्ट संदेश दिया है—
“जब तक सड़क नहीं, तब तक वोट नहीं।”
5 अक्टूबर को गवांणा में ग्रामीणों का श्रमदान सिर्फ सड़क बनाने की कोशिश नहीं, बल्कि वर्षों से उपेक्षित महसूस कर रहे पहाड़ के एक गांव की अपने अधिकार के लिए आवाज होगी।
बहुत हो गए आश्वासन—अब सड़क चाहिए।
गवांणा की आवाज, सड़क का अधिकार।



