
मसूरी। पहाड़ों की रानी मसूरी में आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन को लेकर मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने सर्वे अभियान तेज कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के क्रम में चल रहे इस अभियान के तहत नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वाले भवनों को चिह्नित कर नोटिस जारी किए जा रहे हैं। एमडीडीए के सहायक अभियंता अजय मलिक ने स्पष्ट किया कि आवासीय भवनों में नियमों के विरुद्ध व्यावसायिक गतिविधियां पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मसूरी प्रेस क्लब के तत्वावधान में आयोजित संवाद कार्यक्रम में अजय मलिक ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्देश केवल मसूरी तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों से उत्पन्न होने वाली समस्याओं को रोकने से संबंधित है। उन्होंने बताया कि आवासीय कॉलोनियों में व्यावसायिक गतिविधियों के कारण स्थानीय निवासियों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए सर्वे की कार्रवाई की जा रही है।
एक दिन में 71 निर्माण चिह्नित, 20 को नोटिस की तैयारी
अजय मलिक के अनुसार, सर्वे के दौरान एक ही दिन में 71 निर्माण चिह्नित किए गए। इनमें से 51 निर्माण ऐसे पाए गए, जिनके विरुद्ध पहले से ही कार्रवाई विचाराधीन है, जबकि 20 निर्माणों के स्वीकृत मानचित्र मौके पर प्रस्तुत नहीं किए जा सके। ऐसे मामलों में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि नोटिस जारी करने का उद्देश्य किसी को अनावश्यक रूप से परेशान करना नहीं है। संबंधित लोगों को अपना पक्ष रखने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया जाएगा। सर्वे की प्रक्रिया लंबे समय तक जारी रहेगी और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कदम उठाए जाएंगे।
पुराने निर्माण और स्थानीय निवासियों के लिए क्या हैं प्रावधान?
आवासीय निर्माण और मानचित्र स्वीकृति के संबंध में मलिक ने बताया कि वन संरक्षण अधिनियम, 1980 से पहले के प्लिंथ वाले व्यावसायिक निर्माणों के संबंध में लागू नियमों के तहत मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। वहीं, उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में उत्तराखंड के मूल निवासियों के लिए नगर पालिका क्षेत्र में 100 वर्ग गज तथा पालिका सीमा से बाहर 120 से 150 वर्ग गज तक आवासीय निर्माण की व्यवस्था की गई थी। यह प्रावधान परिवार के विस्तार को ध्यान में रखते हुए किया गया था और इसके लिए भी मानचित्र स्वीकृत कराना आवश्यक है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वन संरक्षण अधिनियम तथा अन्य लागू नियमों के तहत प्रतिबंधित या अधिसूचित क्षेत्रों में निर्माण की अनुमति स्वतः नहीं मिल जाती। वन टाइम सेटलमेंट के संबंध में उन्होंने कहा कि नीति सरकार बनाती है और प्राधिकरण उसका क्रियान्वयन करता है। संबंधित मामलों में स्थानीय निवास प्रमाण पत्र सहित आवश्यक दस्तावेजों और अनापत्ति प्रमाण पत्रों की जरूरत हो सकती है।
मसूरी के बाहरी क्षेत्रों में भी विकास कार्यों का दावा
मसूरी के बाहरी क्षेत्रों में विकास और सौंदर्यीकरण कार्य नहीं होने की धारणा को खारिज करते हुए सहायक अभियंता ने कहा कि एमडीडीए शहर के विभिन्न क्षेत्रों में विकास कार्य करा रहा है। उन्होंने बताया कि मसूरी से प्राधिकरण को अपेक्षाकृत कम आय होने के बावजूद पर्यटन नगरी के महत्व को देखते हुए विकास कार्यों पर ध्यान दिया जा रहा है। उनके अनुसार, एक वर्ष में विभिन्न क्षेत्रों में 15 करोड़ रुपये से अधिक के कार्य किए गए हैं।
होम स्टे के संबंध में उन्होंने कहा कि इसके संचालन के लिए निर्धारित नीति और मानक हैं। मानकों का पालन नहीं करने वाले संचालकों के विरुद्ध भी नोटिस की कार्रवाई की जा रही है।
ईको पार्क और पार्किंग योजनाओं पर भी दी जानकारी
ईको पार्क योजना पर जानकारी देते हुए अजय मलिक ने बताया कि वन संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के कारण संबंधित प्रक्रियाओं में समय लगता है। उन्होंने कहा कि लोनिवि गेस्ट हाउस, अकादमी रोड और जीरो पॉइंट के पास प्रस्तावित पार्किंग के लिए वन विभाग से स्वीकृति मिलने में लगभग तीन वर्ष लगे। ईको पार्क का टेंडर हो चुका है और उन्होंने अगले एक-दो वर्षों में इसके कार्य पूरा होने की उम्मीद जताई।
उन्होंने बताया कि एमडीडीए अब तक चार पार्किंग का निर्माण कर चुका है और आगे भी इस दिशा में कार्य किया जा रहा है। शहरवासियों की ओर से दिए गए पार्किंग प्रस्तावों पर भी कार्रवाई चल रही है। उन्होंने कहा कि स्वीकृत की जाने वाली पार्किंग सार्वजनिक उपयोग के लिए होनी चाहिए।
अवैध निर्माणों पर कार्रवाई जारी रखने की बात
मसूरी में बहुमंजिला भवनों और अवैध निर्माणों से जुड़े सवालों पर मलिक ने कहा कि प्राधिकरण नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करता रहा है। लंढौर क्षेत्र के लिए विशेष शासनादेश जारी होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अवैध निर्माण की स्थिति में कार्रवाई की जाती है। सीलिंग के आदेश या चालान के बावजूद निर्माण जारी रहने के मामलों को भी प्राधिकरण के संज्ञान में लाने की अपील की।
मसूरी में आवासीय कॉलोनी विकसित करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि प्राधिकरण के पास अपना पर्याप्त भूमि बैंक नहीं होने के कारण कठिनाइयां आती हैं। यदि नगर पालिका या अन्य स्रोतों से भूमि उपलब्ध होती है, तो आवासीय कॉलोनी विकसित करने की संभावनाओं पर काम किया जा सकता है। पहाड़ी क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए निर्माण स्वीकृति के लिए ढलान संबंधी मानकों और खनन विभाग की आवश्यक अनापत्ति का भी ध्यान रखा जाता है।
प्रेस क्लब ने किया सहायक अभियंता का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान मसूरी प्रेस क्लब की ओर से एमडीडीए के सहायक अभियंता अजय मलिक का स्वागत किया गया। प्रेस क्लब अध्यक्ष सुनील सिलवाल ने उन्हें पहाड़ी टोपी, अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर प्रेस क्लब महासचिव सूरत सिंह रावत सहित बिजेंद्र पुंडीर, हरीश कालरा, दीपक रावत, मोहसिन तन्हा, आशीष भट्ट, नरेश नौटियाल, सुमित कंसल, रजत एकांत, अमित गुप्ता, मोनिका मेहरा, मोहन कैंतुरा, शिव अरोड़ा और डॉ. नीरज सिंघल सहित अन्य पत्रकार मौजूद रहे।
PahadFirst की नजर: मसूरी में आवासीय और व्यावसायिक निर्माणों के बीच नियमों का पालन सुनिश्चित करना, स्थानीय निवासियों के हितों की रक्षा करना और शहर की नियोजित विकास व्यवस्था बनाए रखना आने वाले समय में एमडीडीए के लिए अहम चुनौती होगी।


