देहरादूनमसूरी

भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण को लेकर सभासद जसबीर कौर ने उठाई आवाज, जिलाधिकारी से संयुक्त सर्वे की मांग।

मसूरी। नगर पालिका परिषद मसूरी की भूमि पर लगातार बढ़ते अतिक्रमण और सीमांकन विवादों को लेकर नगर पालिका सभासद जसबीर कौर ने जिलाधिकारी को एसडीएम कार्यालय के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर पालिका की समस्त भूमि का संयुक्त सर्वे कराने की मांग उठाई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि नगर पालिका परिषद मसूरी की अधिकांश भूमि का स्पष्ट सीमांकन और वास्तविक पहचान न होने के कारण कई स्थानों पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। वर्तमान स्थिति में यह तय करना मुश्किल हो गया है कि कौन सी भूमि नगर पालिका की है और उसकी वास्तविक सीमाएं कहां तक हैं।
सभासद जसबीर कौर ने मांग की कि मसूरी नगर पालिका क्षेत्र की समस्त भूमि का संयुक्त सर्वे राजस्व विभाग, नगर पालिका परिषद मसूरी, मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) तथा टिहरी जनपद के संबंधित विभागों की संयुक्त टीम द्वारा कराया जाए, ताकि सभी विभागों के अभिलेखों का मिलान कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
उन्होंने कहा कि संयुक्त सर्वे से सरकारी भूमि पर हो रहे अतिक्रमण की पहचान आसान होगी और भविष्य में पालिका की संपत्तियों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। साथ ही भूमि संबंधी विवाद और भ्रम की स्थिति भी समाप्त हो सकेगी।
जसबीर कौर ने कहा कि पूर्व में भी इस विषय को उठाया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि सुवाखोली से लेकर भद्राज तक पालिका की भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होना बेहद जरूरी है, क्योंकि लगातार कब्जों और विभागीय दावों के कारण विवाद बढ़ते जा रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार विकासनगर और टिहरी प्रशासन की ओर से भी अलग-अलग दावे किए जाते हैं, जिससे स्थिति और अधिक उलझती जा रही है। उन्होंने बताया कि भद्राज क्षेत्र में पालिका की लगभग पांच सौ बीघा भूमि को लेकर विवाद बना हुआ है, जबकि वहां वनाधिकार समिति गठित करने की प्रक्रिया भी चल रही है।
सभासद ने कहा कि किंक्रेग, गार्डन और जॉर्ज एवरेस्ट सहित कई क्षेत्रों में पालिका की भूमि पर अतिक्रमण के मामले सामने आते रहे हैं। पहले इन क्षेत्रों में पालिका के सीमांकन पिलर मौजूद थे, लेकिन अब अधिकांश स्थानों से वे गायब हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सरकारी भूमि की सुरक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में बड़े विवाद और गंभीर परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी भूमि को सुरक्षित रखकर भविष्य में वहां गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए आवासीय योजनाएं भी संचालित की जा सकती हैं।

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